_– तकनीकी चूक पर जेल खत्म, लगेगा सिर्फ जुर्माना_
_– मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत संग हुई उच्चस्तरीय बैठक में फैसला_
_– सिंगल विंडो सिस्टम और स्व-प्रमाणीकरण अनिवार्य करने का आदेश_
रिपोर्ट: सुनील कुमार,पटना(बिहार)
पटना: राज्य में डीरेगुलेशन फेज-2 के तहत लंबित सभी मामलों को अगले 15 दिनों में निपटाकर पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश दिया गया है। केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव केके पाठक ने शुक्रवार को मुख्य सचिवालय में समीक्षा बैठक में साफ कहा कि इसमें कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की।
बैठक के 5 बड़े फैसले:
1. जेल की जगह पेनालिटी: व्यावसायिक कानूनों में छोटी तकनीकी चूक पर कारावास के प्रावधान हटेंगे। अब सिर्फ अर्थदंड लगेगा। प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश।
2. 15 दिन की डेडलाइन: फेज-2 के सभी लंबित सुधार 15 दिन में पूरे करें। एक से ज्यादा विभाग से जुड़े मामलों में कैबिनेट सचिवालय समन्वय करेगा।
3. हर शुक्रवार रिपोर्टिंग: सभी नोडल अधिकारी हर शुक्रवार को प्रगति रिपोर्ट कैबिनेट सचिवालय को भेजेंगे।
4. कम्पलायंस बर्डन कम होगा: विभाग अनावश्यक नियम, रिटर्न और रजिस्टरों की सूची बनाएं जिन्हें खत्म किया जा सके। पाठक बोले- “अनावश्यक नियम निवेश में बाधा हैं।”
5. बिल्डिंग बाय-लॉज में बदलाव: राष्ट्रीय भवन संहिता 2026 के नए मानकों को राज्य के बिल्डिंग बाय-लॉज में जोड़ा जाएगा। FAR नियम तर्कसंगत होंगे। सरकारी संपत्तियों के लिए TFM मॉडल अपनाया जाएगा।
CS का निर्देश: मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी स्वीकृतियों के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ और ‘स्व-प्रमाणीकरण’ अनिवार्य करने को कहा। इससे मानवीय हस्तक्षेप घटेगा। सभी विभाग ‘मिशन मोड’ में काम करें।
विशेष सचिव केके पाठक ने बिहार की प्रगति पर संतोष जताया और केंद्र से पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया। बैठक में वित्त, उद्योग, नगर विकास, भवन निर्माण समेत कई विभागों के ACS, प्रधान सचिव और सचिव मौजूद रहे।
बिहार: 15 दिन में निपटाएं डीरेगुलेशन फेज-2 के सभी काम: विशेष सचिव केके पाठक का सख्त निर्देश
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