— सोनू कुमार पत्रकार
दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज पांच परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनमें चार रेलवे परियोजनाएं और एक राजमार्ग परियोजना शामिल हैं। नई दिल्ली में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज 13 हजार 41 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं को मंजूरी दी।

श्री वैष्णव ने बताया कि रेलवे की चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के आठ जिलों को सेवाओं के दायरे में लाएंगी। ये परियोजनाएं हैं खड़गपुर भद्रक चौथी लाइन, भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन, गुम्मिडीपुंडी-गुदुर तीसरी और चौथी लाइन और कटक-पारादीप तीसरी और चौथी लाइन। इससे भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर की वृद्धि होगी। श्री वैष्णव ने बताया कि इन परियोजनाओं की लागत 9 हजार 450 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है और इन्हें 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
श्री वैष्णव ने कहा कि विस्तारित रेल लाइन से आवागमन में काफी सुधार होगा। इससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में भी वृद्धि होगी। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 60 लाख की आबादी वाले लगभग 6 हजार 448 गांवों तक पहुंच बढ़ेगी।
प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा। इनमें कुलदिहा वन्यजीव अभ्यारण्य, भीतर्कनिका राष्ट्रीय उद्यान, मां भद्रकाली मंदिर, मां धमराई मंदिर, पंचलिंगेश्वर मंदिर, पुलिकट झील, नेलापट्टू पक्षी अभ्यारण्य, भगवान वीरराघव पेरुमल मंदिर, धबलेश्वर मंदिर और बौद्ध स्थल ललितगिरि शामिल हैं। ये परियोजनाएं कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और अनाज जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं।
श्री वैष्णव ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड को चार लेन वाले मानक राजमार्ग में अपग्रेड करने को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि 82 दशमलव 57 किलोमीटर लंबी यह परियोजना तीन हजार 590 करोड़ रुपये से अधिक की कुल पूंजी लागत से विकसित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित परियोजना बिहार के बढ़ते राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ने के कारण रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस परियोजना से यात्रियों और माल की आवाजाही तेज और सुरक्षित होने की उम्मीद है। साथ ही यात्रा दक्षता में भी सुधार होगा और क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा। 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के लिए तैयार किए गए राजमार्ग पर औसत गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे रहेगी। इससे तेज और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित होगी।



