Homeजीवन मंत्रशिव उगना के रूप में आएं मिथिला में

शिव उगना के रूप में आएं मिथिला में


आशीष रंजन।✍️


जहां एक तरफ प्रभु श्रीराम मिथिला के दामाद बनकर आए जिसे पहुना भी कहा जाता है। वहीं दूसरी ओर भगवान शिव मैथिली के सुप्रसिद्ध कवि विद्यापति जी के भक्ति से प्रसन्न होकर मिथिला में जन्में महान कवि विद्यापति जी के यहां स्वयं उगना के रूप में आए।

मिथिला की भक्ति और शक्ति अलौकिक है सांस्कृतिक कहानी अपने आप में अलौकिक है। किंतु आप यह जानते हैं कि भगवान शिव ने किस स्थल पर विद्यापति को असली रूप दिखाया था। विद्यापति जी मैथिली, हिन्दी और संस्कृत समेत कई अन्य भाषाओं के जानकार थे। वह शिवजी के अन्नय उपासक थे। महान कवि विद्यापति जी का जन्म मधुबनी जिले के “बिस्फी” गांव में 14वीं शताब्दी में हुआ था। इनका पूरा नाम “विद्यापति ठाकुर” था। उन्हें मिथिला का “कवि कोकिल कहा जाता है”। विद्यापति जी शिव के परम भक्त थे। उनके रचनाओं में राधा – कृष्ण के प्रेम और भक्ति का सौंदर्य जबरदस्त है। विद्यापति जी ठाकुर राजा शिव सिंह के दरबारी कवि थे। वे अपने पिता के साथ सिंह जी के दरबार में हमेशा जाया करते थे विद्यापति जी के पिता और ठाकुर राजा शिव सिंह से बेहतर संबंध थे। भगवान शिव के परम भक्त होने के कारण भगवान शिव विद्यापति जी के यहां उगना बनकर आए और नौकर के रूप में रहे। उगना को नौकर के रूप में रखने के लिए विद्यापति जी तैयार नहीं हो रहे थे क्योंकि उनके पास उगना को वेतन देने के लिए पैसे नहीं थे फिर भी उगना जिद कर रहे थे रहने के लिए अंत में जाकर विद्यापति जी ने अपनी पत्नी के कहने पर उगना को रख लिया। उगना उनके यहां दो वक्त की खाना पर काम करने लगे। जब एक दिन विद्यापति जी ठाकुर राजा शिव सिंह के दरबार में जा रहे थे उस समय भीषण गर्मी थी और उन्हें जोड़ो की प्यास लगी थी तब वो उगना से बोले मेरे लिए कहीं से जल लाओ मेरी गला सुखती जा रही है तब शिव चहु ओर घुमकर जल लेने निकले लेकिन उन्हें कहीं नदी या तालाब नहीं मिला तब वो अपने जटा खोलकर जटा से “गंगा जल” निकाली और विद्यापति जी को पिलाया जब वो जल ग्रहण किए तो जल का स्वाद प्योर गंगाजल की तरह था। जब वो गंगाजल पिए तो उनकी प्यास बुझी लेकिन विद्यापति जी ने उगना से वास्तविक रूप जानने के लिए जिद करने लगे तब शिवजी अपने वास्तविक रूप में आएं तब विद्यापति जी ने शिवजी का चरण पकड़ लिया और शिवजी ने उनसे कहा कि मैं तुम्हारे साथ उगना बनकर रहूंगा यह बात किसी को पता नहीं होनी चाहिए। बहुत दिनों बाद विद्यापति जी की पत्नी सुशीला ने उनको कोई काम दिया। उगना ने काम को समझा नहीं और गलती कर बैठे तब सुशीला उस समय मिट्टी के चुल्हे पर कुछ बना रही थी उसी चुल्हे से जल्ती हुई लकड़ी से उनकी पिटाई कर दी इस दुख को विद्यापति जी झेल नहीं पाए और पत्नी से कह बैठे यह स्वयं शिव जी है जब ये बात उनके मुंह से निकली कि शिव तुरंत अंतर्ध्यान हो गए तब विद्यापति जी उन्हें बहुत खोजते – खोजते परेशान हो गए तब शिव ने उन्हें कहा कि मैं तुम्हारे साथ हमेशा रहूंगा लेकिन शिवलिंग के रूप में तब मधुबनी जिला के भवानीपुर गांव में शिवलिंग के रूप में शिव प्रकट हुए अब इस स्थान को “उगना महादेव” के नाम से जाना जाता है जहां शिवरात्रि के अवसर पर सीतामढ़ी, दरभंगा और नेपाल से लाखों श्रद्धालु आते हैं और दर्शन करते हैं यहां भक्त जो भी शिवजी से मांगते हैं भगवान शिव उनकी हर मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

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