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सहकारिता के क्षेत्र में है रोजगार की असीम संभावना: मंत्री

– 4.28 लाख किसानों से 29.22 लाख मीट्रिक टन धान की हो चुकी है खरीदारी


* राज्य में पैक्सों को मल्टी सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है
* सहकारिता के क्षेत्र में हुए बेहतर कार्यों को देखने के लिए गुजरात जाएंगी कई टीमें

रिपोर्ट: सुनील कुमार,पटना(बिहार)

पटना: सहकारिता के क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावना है। सहकारिता के माध्यम से बड़ी संख्या में रोजगार आएगा। जल्द ही बिहार से कई टीमें गुजरात भेजी जाएंगी, वहां देखा जाएगा कि सहकारिता के क्षेत्र में कैसे बेहतर काम किए गए हैं। गुजरात में सहकारिता के सफल कार्यों को बिहार में भी लागू किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सके। इसमें सहकारिता आधारित खेती से जुड़ी संभावनाओं को तलाशना भी शामिल हैं। सहकारिता आधारित खेती से रोजगार के अवसर कैसे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह जानकारी सोमवार को सहकारिता विभाग की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के “संवाद कक्ष” में आयोजित की गई थी। इसमें उन्होंने विभाग की विभिन्न उपलब्धियों की जानकारी मीडिया को दी।
      मंत्री ने कहा कि बिहार में सहकारिता आधारित खेती की असीम संभावनाएं हैं। पहले यहां खेती के बड़े रकबे हुआ करते थे, अब खेती की जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े अधिक हो गए हैं। इसके मद्देनजर सहकारिता आधारित खेती की संभावनाएं बढ़ गई हैं। उन्होंने गया में तिलकुट उत्पादन का बहुत बड़ा केंद्र है। परंतु वहां तिल मध्यप्रदेश, तमिलनाडु समेत दूसरे राज्यों से आता है। ऐसे में यहां सहकारिता आधारित खेती की मदद से तिल के उत्पादन की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि भंडारण के क्षेत्र में भी हम काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर तीन सहकारिता समितियां बनी हैं, इसमें भी बिहार से बड़ी संख्या में सदस्य बन रहे हैं। बिहार में सहकारी स्तर पर खेती की संभावनाओं को भी हम तलाश रहे हैं।
        इस प्रेस वार्ता में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह ने कहा कि आज बिहार में करीब 28 हजार सहकारी समितियां कार्यरत हैं। निकट भविष्य में यह संख्या बहुत बड़ी होने वाली है। काम्फेड द्वारा प्रत्येक गांव में एक सहकारी समिति का गठन किया जा रहा है। शहद के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रखंड स्तर पर 144 प्राथमिक समितियां कार्यरत हैं। मखाना उत्पादक सहकारी समितियों का गठन भी किया जा रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन के लिए सहकारिता विभाग काम कर रहा है।
      पैक्सों को मल्टी सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। 4,477 पैक्सों को कंप्यूटरीकृत किया जा चुका है। सहकारी समितियों के अध्यक्षों को राज्य के बाहर प्रतिष्ठित संस्थानों में एक सप्ताह के प्रशिक्षण के लिए भेजा जा रहा है।
*79 फीसदी धान की खरीद हो चुकी*
मंत्री ने कहा कि खरीफ विपणन मौसम 2025-26 में अब तक 6,879 समितियों के जरिए 4.28 लाख किसानों से 29.22 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदारी हो चुकी है। इस मौसम में धान खरीदारी का लक्ष्य 36.85 लाख मीट्रिक टन है। कुल लक्ष्य का 79.30 प्रतिशत धान की खरीद की जा चुकी है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में 6,400 करोड़ रुपये का भुगतान उनके खाते में किया जा चुका है।

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