दैनिक हिन्दी न्यूज|डेस्क
पांडिच्चेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा “डिजिटल सुलभता: सभी के लिए एक समावेशी भविष्य का निर्माण” विषय पर 76वीं अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में रेडियो उड़ान के संस्थापक श्री दानिश महाजन (राष्ट्रपति सम्मान के साथ अन्य कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित) ने प्रमुख वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि सही समय पर सही जानकारी जरूरतमंद लोगों तक पहुँचाना प्रत्येक भारतीय नागरिक और मीडिया का कर्तव्य है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में करोड़ों लोग केवल जानकारी के अभाव में घरों तक सीमित जीवन जी रहे हैं। समाज में दिव्यांगों के प्रति संवेदनशील सोच विकसित करने की आवश्यकता है।
श्री महाजन ने कहा कि “हैंडीकैप” शब्द दिव्यांग व्यक्तियों के लिए उचित नहीं है, क्योंकि इसका अर्थ नकारात्मक भाव उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की चुनौती ही उसकी सबसे बड़ी प्रेरणा बन सकती है। मीडिया में दिव्यांगों की समस्याओं को बहुत कम स्थान मिलता है और वह भी तब, जब कोई दिव्यांग असाधारण उपलब्धि हासिल करता है।
उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनमें आत्मविश्वास जगाने के उद्देश्य से “रेडियो उड़ान” की स्थापना की गई। यह मंच दिव्यांगजनों द्वारा संचालित है तथा उनके सशक्तिकरण के लिए कार्य करता है। इसके माध्यम से रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण, शिक्षा, कानूनी सलाह एवं मनोरंजन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। अब तक लगभग 2000 लोगों के साक्षात्कार लेकर उनकी प्रेरणादायी कहानियों को समाज के सामने प्रस्तुत किया जा चुका है।
श्री महाजन ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने डिजिटल सुगमता को मौलिक अधिकार और मानवाधिकार माना है। इसलिए सभी वेबसाइटों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को सभी के लिए सुलभ बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए दिव्यांगजनों की सहभागिता अनिवार्य है। केवल प्रेरणा देने से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि उनकी सक्रिय भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना होगा।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ० सी. जयशंकर बाबु ने कहा कि समावेशी भविष्य का निर्माण तभी संभव है जब समाज के प्रत्येक व्यक्ति में जागरूकता और संवेदनशीलता विकसित की जाए। उन्होंने श्री दानिश महाजन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे शासन, न्याय, पत्रकारिता और समाज में सकारात्मक चेतना जागृत करने का प्रेरणादायी कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम के सह-संयोजक श्री उमेश प्रजापति ने संचालन करते हुए सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में विद्वान, अध्यापक, शोधार्थी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।



