मुंगेर ने फिर याद की 1934 की भयावह रात
1934 के विनाशकारी भूकंप के शहीदों को मुंगेर में श्रद्धांजलि
92वें वर्ष भी निभाई गई परंपरा, हवन-यज्ञ व नारायण भोज का हुआ आयोजन

ब्यूरो रिपोर्ट पीयूष कुमार प्रियदर्शी
मुंगेर में 15 जनवरी को वर्ष 1934 के विनाशकारी भूकंप में जान गंवाने वाले 1434 लोगों की स्मृति में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भूकंप दिवस समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हुए। यह परंपरा पिछले 92 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है, जो मुंगेर के इतिहास और सामूहिक स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।


कार्यक्रम की शुरुआत हवन-यज्ञ से की गई, जिसमें भूकंप में मारे गए लोगों की मृत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इसके बाद उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मुंगेर की मेयर कुमकुम देवी और विधायक कुमार प्रणय मौजूद रहे। दोनों जनप्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए सेवा भाव का परिचय दिया और स्वयं अपने हाथों से लोगों को भोजन परोसा।
कार्यक्रम के तहत नारायण भोज का आयोजन किया गया, जिसमें पूड़ी, सब्जी, बूंदिया, खीर, रसगुल्ला और चटनी सहित विभिन्न प्रकार के व्यंजन परोसे गए। भूकंप दिवस समिति के सदस्यों ने बताया कि इस वर्ष भी एक हजार से अधिक लोगों को शुद्ध एवं स्वादिष्ट भोजन कराया गया। समिति के सदस्यों ने 1934 के भयावह भूकंप की स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि उस त्रासदी में पूरा मुंगेर शहर मलबे में तब्दील हो गया था और हजारों लोगों की जान चली गई थी।
उन्होंने यह भी बताया कि भूकंप के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री सहित देश की कई बड़ी हस्तियां मुंगेर पहुंचीं और शहर के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इतिहास की उस दर्दनाक घटना से सीख लेने, आपदा के समय एकजुट रहने और मानवता की सेवा करने का संदेश भी देता है।



