हिलसा ,नालंदा
संवाददाता: सुरेन्द्र शर्मा, हिलसा
हिलसा प्रखंड अंतर्गत कपसियावां ग्राम में आयोजित श्री श्री 1008 श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह महायज्ञ के छठे दिन धार्मिक आस्था और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। प्रातःकाल ठाकुर जी को सुसज्जित पालकी पर विराजमान कर पूरे गांव में भव्य नगर भ्रमण कराया गया। पालकी यात्रा के दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए जयकारों के साथ शामिल हुए, जिससे पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
रात्रि में कथा पंडाल में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह महोत्सव बड़े ही श्रद्धा, उल्लास और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का मनोहारी मंचन एवं भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। विवाह महोत्सव के दौरान भजनों, मंगलगीतों और पुष्पवर्षा से पूरा पंडाल भक्तिरस से सराबोर हो गया।

कथा वाचिका सुश्री राजलक्ष्मी जी एवं पंडित श्री आनंद राज जी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के पावन मिलन का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि सच्ची श्रद्धा, अटूट विश्वास और भक्ति से ही भगवान की कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह धर्म, प्रेम, समर्पण और मर्यादा का प्रतीक है, जो मानव जीवन को आदर्श मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर मंच संचालन की जिम्मेदारी आरजे अनितेश कश्यप ने प्रभावशाली ढंग से निभाई, जबकि कथा संचालन हरि बाबा द्वारा किया गया। महायज्ञ के मुख्य यजमान सुरेंद्र शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी सियामनी देवी रहे। साथ ही उनके पुत्र राजीव कुमार एवं पुत्रवधू पुन्नी देवी भी पूरे आयोजन में उपस्थित रहे और धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता निभाई।
महायज्ञ में नालंदा सहित आसपास के विभिन्न गांवों और दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण एवं श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह महोत्सव के दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं ने भक्ति-भाव से कथा का श्रवण किया तथा आयोजन समिति की व्यवस्थाओं की सराहना की। पूरे दिन धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और कथा प्रवचन से कपसियावां गांव का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।



