मुंगेर | पीयूष कुमार प्रियदर्शी
देवउठनी एकादशी से शुरू होने वाले शादी-विवाह के मौसम को देखते हुए गैरसरकारी संगठन पारिवार विकास चंद्रशेखर नगर ने जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) से बाल विवाह की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी और अत्यधिक सतर्कता बरतने की अपील की है।
संगठन ने जिला प्रशासन को भेजी गई चिट्ठी में कहा है कि “शादी के शुभ मुहूर्तों के दौरान कई परिवार बच्चों की शादी तय कर देते हैं। इसलिए यह समय प्रशासनिक सतर्कता का सबसे अहम दौर है।” संगठन ने यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि ऐसी कोई भी घटना प्रशासन की जानकारी से ओझल न रहे और तत्काल कार्रवाई की जाए।
पारिवार विकास ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि किसी संभावित बाल विवाह की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन (112), चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) या स्थानीय थाने को सूचित करें ताकि अपराध को समय रहते रोका जा सके।
संगठन ने जिला प्रशासन से कहा है कि वह सरपंचों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पुलिस को विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दे। साथ ही, गांवों और स्कूलों में बाल विवाह विरोधी जागरूकता अभियान को और तेज करने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है।
पारिवार विकास के भावानंद सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के अपने ऐतिहासिक फैसले में जिलों को बाल विवाह रोकने के लिए सक्रिय रहने को कहा है। उन्होंने कहा,
> “हम केवल सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों पर अमल की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने भी 27 नवंबर 2024 को ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की थी, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक बाल विवाह का पूर्ण खात्मा है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि देवउठनी एकादशी जैसे शुभ अवसर पर कोई भी बाल विवाह न होने पाए।”
पारिवार विकास चंद्रशेखर नगर बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए काम कर रहे नागरिक समाज नेटवर्क Just Rights for Children का सहयोगी संगठन है। यह संगठन ‘सुरक्षा, बचाव और अभियोजन’ मॉडल पर कार्य करते हुए स्कूलों, समुदायों और धार्मिक नेताओं के माध्यम से जनजागरूकता फैला रहा है।
संगठन ने प्रशासन से यह भी कहा है कि सभी सरपंच अपने गांव में होने वाले विवाह समारोहों की निगरानी करें, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता विवाहों की सूची तैयार करें, और स्कूल यह ध्यान रखें कि कोई छात्र अचानक अनुपस्थित तो नहीं है।
इसके अलावा, पारिवार विकास ने धार्मिक नेताओं, टेंट हाउस, बैंड-बाजा और अन्य विवाह सेवा प्रदाताओं से भी अपील की है कि वे किसी भी बाल विवाह में सेवाएं न दें। संगठन ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA) 2006 का हवाला देते हुए कहा कि इसमें शामिल या सहयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति को दो साल तक का सश्रम कारावास या एक लाख रुपये जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
देवउठनी एकादशी से शुरू होने वाले विवाह सीजन में बाल विवाहों पर सख्त निगरानी रखे प्रशासन : पारिवार विकास
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