–सोनू कुमार पत्रकार
दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और म्यामां के राष्ट्रपति ऊ मिन आऊं लाइन् ने व्यापार तथा आर्थिक संबंधों, रक्षा तथा सुरक्षा संबंधी मुद्दों, सीमा प्रबंधन, विकास सहायता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय स्थिति सहित द्विपक्षीय मुद्दों की पूरी श्रृंखला पर विस्तृत चर्चा की है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने वार्ता के बाद नई दिल्ली में संवाददाताओं को बताया कि दोनों पक्षों ने विशेष रूप से व्यापार, निवेश और ऊर्जा में करीबी साझेदारी मजबूत करने पर भारत-म्यांमार सहमत। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने लोगों के बीच संपर्क के लिए कनेक्टिविटी के महत्व पर बल दिया और कलादान मल्टी मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना को यथाशीघ्र पूरा करने की दिशा में काम करने पर सहमति व्यक्त की।

विदेश सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने म्यामां की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत के समर्थन की पुष्टि की । दोनों पक्षों ने अपने सुरक्षा हितों के प्रतिकूल गतिविधियों के लिए क्षेत्र के दुरुपयोग को रोकने के महत्व पर बल दिया। श्री मिसरी ने कहा कि म्यामां के राष्ट्रपति ने इस बात का आश्वासन दोहराया कि म्यामां की भूमि का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के विरुद्ध नहीं होने दिया जाएगा। श्री मिसरी ने कहा कि म्यामां एक महत्वपूर्ण देश है और भारत का पड़ोसी है जिसके साथ भारत 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। भारत और म्यामां के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2 अरब डॉलर से अधिक है। महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ धातुओं के क्षेत्र में आर्थिक सहयोग बढ़ाने के विषय पर विदेश सचिव ने कहा कि आज हुई चर्चा में इन मुद्दों पर बातचीत हुई।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में विदेश सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यामां की पूर्व राजकीय काउंसलर आंग सान सू की का मुद्दा उठाया था । यह चर्चा म्यामां में लंबे समय से चल रही शांति प्रक्रिया के संदर्भ में हुई थी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि म्यामां के साथ भारत की बातचीत का उद्देश्य वहां की आंतरिक राजनीतिक व्यवस्थाओं पर टिप्पणी करना नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत ने लोकतंत्र, शांति प्रक्रिया, समावेशिता और संवाद में सभी हितधारकों की भागीदारी के महत्व से संबंधित मुद्दों पर हमेशा अपने विचार रखे हैं।



