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भौंरा कुंड बना पिकनिक और वनभोज का नया आकर्षण,सड़क पहुंच आसान होने से बढ़ी सैलानियों की भीड़, सरकारी योजनाओं से पर्यटन विकास की जगी उम्मीद ,जंगल के अंदर दर्जनों गर्म जल के है श्रोत, छोटी छोटी नदिया









पीयूष कुमार प्रियदर्शी|बिहार

ठंड के मौसम के आगमन के साथ ही प्राकृतिक वादियों और रमणीक स्थलों पर पिकनिक मनाने वालों की भीड़ उमड़ने लगती है। इसी कड़ी में हवेली खड़गपुर प्रखंड के दरियापुर-2 पंचायत अंतर्गत स्थित प्राचीन प्राकृतिक स्थल भौंरा कुंड एक बार फिर सैलानियों का पसंदीदा केंद्र बनकर उभर रहा है। चारों ओर हरे-भरे पहाड़, घने जंगल, छोटी-छोटी नदियां और दर्जनों गर्म जल स्रोतों से घिरा यह स्थल वर्षों से वनभोज और पिकनिक के लिए प्रसिद्ध रहा है।



भौंरा कुंड का इतिहास काफी पुराना है। स्थानीय लोगों के अनुसार, प्राचीन काल से ही यहां लोग गर्म जल कुंड में स्नान और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने आते रहे हैं। हालांकि पहले यहां पहुंचना बेहद कठिन था। हवेली खड़गपुर झील के समीप से तीन-चार पहाड़ों को पार कर, घने जंगलों के बीच पैदल यात्रा कर लोग किसी तरह भौंरा कुंड तक पहुंचते थे। दुर्गम रास्ता, जंगली इलाका और एक समय नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण यहां सैलानियों की संख्या सीमित रहती थी। केवल प्रकृति प्रेमी या आसपास के ग्रामीण ही यहां पहुंच पाते थे।

लेकिन वर्ष 2025 के अंत और 2026 नए साल से यहां तस्वीर बदलती नजर आ रही है। हाल के दिनों में खड़गपुर झील और जंगल की ओर से भौंरा कुंड के समीप तक वन विभाग द्वारा कच्ची सड़क का निर्माण किया गया है। इससे अब दोपहिया और चारपहिया वाहनों से लोग 400-500 मीटर पहले तक पहुंच जा रहे हैं। शेष दूरी पैदल तय करनी होती है, लेकिन पहले की तुलना में यह सफर काफी आसान हो गया है। यहां जंगल में दर्जनों गर्म जल का श्रोत है।यही वजह है कि अब भौंरा कुंड केवल स्नान स्थल नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ नया पिकनिक और पर्यटन केंद्र बनता जा रहा है।



दिसंबर से जनवरी के बीच यहां सैलानियों की खास भीड़ देखी जाती है। लोग गर्म जल कुंड में स्नान कर ठंड से राहत पाते हैं और परिवार व दोस्तों के साथ वनभोज का आनंद लेते हैं। स्थानीय मान्यता है कि यहां का पानी पहाड़ों की तराई से निकलता है, जिसमें जड़ी-बूटी और औषधीय गुण मौजूद हैं। यही कारण है कि आसपास के लोग इस पानी को डब्बों में भरकर घर भी ले जाते हैं।


पिकनिक मनाने आए स्थानीय लोगों और सैलानियों ने इस स्थल के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।


खुशबू वर्मा ने कहा कि वह हर साल यहां आती हैं। “अगर कुंड तक पक्की सड़क बन जाए तो यहां और भी ज्यादा लोग आएंगे। सुविधाओं के विकास की जरूरत है,” उन्होंने कहा।

पप्पू वर्मा ने इसे अपने घर के पास का शानदार पिकनिक स्थल बताते हुए कहा कि “भीमबांध की तरह अगर इसे भी विकसित किया जाए तो यह जगह और बेहतर हो सकती है। आज हम पूरे परिवार के साथ यहां आए हैं।”

बरियारपुर से आए अनिल कुमार ने गर्म जल कुंड में स्नान को बेहद आनंददायक बताया। वहीं केशव कुमार ने बच्चों के लिए झूला, सेल्फी प्वाइंट और अन्य पर्यटक सुविधाएं विकसित करने की मांग की।

एससी-एसटी नेता सुभाष पासवान ने कहा कि भौंरा कुंड जंगल की कंदराओं में स्थित एक अनमोल धरोहर है। “गर्म जल को कुंड के रूप में विकसित कर यहां पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। यह स्थल खड़गपुर से मात्र चार किलोमीटर दूर है और झील के समीप होने से इसकी सुंदरता और बढ़ जाती है,” उन्होंने कहा।



विक्की राय ने भी सरकार से ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि अगर यहां सुनियोजित विकास हो, तो यह स्थल भी भीमबांध से कम नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा भीमबांध को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल  बनाने की घोषणा की गई है। ऐसे में खड़गपुर झील और उसके आसपास स्थित भौंरा कुंड जैसे प्राकृतिक स्थलों को भी साथ-साथ विकसित किया जाए, तो पूरे क्षेत्र की पर्यटन तस्वीर बदल सकती है।

कुल मिलाकर, भौंरा कुंड आज पिकनिक और वनभोज का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। बेहतर सड़क, मूलभूत सुविधाएं और सरकारी योजनाओं का समुचित क्रियान्वयन इस प्राकृतिक धरोहर को न केवल स्थानीय, बल्कि राज्यस्तरीय पर्यटन मानचित्र पर भी एक नई पहचान दिला सकता है।

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