पीयूष कुमार प्रियदर्शी/बिहार डेस्क
मुंगेर जिले के नक्सल प्रभावित पैसरा पहाड़ी जंगल में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मुंगेर पुलिस, बी-215 समवाय एवं सीआरपीएफ पैसरा कैंप की संयुक्त टीम द्वारा नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे सी-लेवल संयुक्त अभियान (ऑपरेशन शैडो) के दौरान एक पेड़ की खोह से 49 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। यह कार्रवाई लड़ैयाटांड थाना क्षेत्र अंतर्गत की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संयुक्त टीम पैसरा से सवासीन पहाड़ी जंगल की ओर सर्च ऑपरेशन के तहत आगे बढ़ रही थी।
इसी दौरान जवानों की नजर जंगल में स्थित एक पेड़ की खोह पर पड़ी, जहां कुछ संदिग्ध वस्तु दिखाई दी। संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए डीएसएमडी संचालक और डॉग हैंडलर की मदद से इलाके की गहन जांच की गई।
जांच के दौरान पेड़ की खोह से एक काली प्लास्टिक शीट निकाली गई। जब उसे खोला गया तो उसके अंदर से 49 जिंदा कारतूस बरामद हुए। बरामद कारतूसों को जब्त कर लिया गया है। इस मामले को लेकर लड़ैयाटांड थाना में आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने आगे की छानबीन शुरू कर दी है।
इस संबंध में पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने बताया कि यह कारतूस पूर्व में नक्सलियों द्वारा जंगल में छिपाकर रखे गए थे। उन्होंने कहा कि लगातार चल रहे सर्च और शैडो अभियान के कारण नक्सलियों के पुराने ठिकानों से अब हथियार और गोला-बारूद बरामद हो रहे हैं।
पूर्व में नक्सलियों का गढ़ रहा है इलाका
उल्लेखनीय है कि पैसरा और सवासीन पहाड़ी जंगल कभी नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। नक्सली यहां पहाड़ों, जमीन के अंदर और पेड़ों की खोह में हथियार व कारतूस छिपाकर रखते थे। लेकिन भीमबांध और पैसरा क्षेत्र में सीआरपीएफ कैंप खुलने के बाद लगातार चलाए गए संघन अभियानों से क्षेत्र अब लगभग नक्सल मुक्त हो चुका है। नक्सलियों के आत्मसमर्पण और बरामदगी से सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।



