रिपोर्ट उमेश कुमार,,शेखपुरा (बिहार)
पोक्सो मामलों के विशेष न्यायाधीश कुमार अविनाश ने नबालिग के यौन शोषण मामले में एक ट्यूटर को 20 साल की सजा दी है. उसपर 50-50 हजार रुपए का दो अर्थदंड भी दिया है. अर्थ दंड नहीं जमा करने पर छह माह के अतिरिक्त सजा भुगतने का आदेश दिया है. इसके अलावा इस घटना में पीड़ित दोनों बालिका को सरकारी प्रतिकार के रूप में दो-दो लाख रुपया भुगतान का भी आदेश दिया है. दोषी को दिये गए अर्थ दंड की राशि भी पीड़िता को ही देने को कहा है. ट्यूटर गौतम केसरी नगर क्षेत्र के महारानी स्थान के रहने वाले राजेंद्र प्रसाद के पुत्र हैं. गौतम केसरी पर आरोप लगाया गया था कि वह ट्यूशन पढ़ने के दौरान बालिकाओं के साथ अनैतिक यौन हरकत करते हैं. घर में लगे सीसीटीवी कैमरा में उनकी घिनौनी हरकत दर्ज होने के बाद यह मामला नाबालिग बालिका के माता-पिता द्वारा पुलिस के समक्ष उजागर की गई. पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उसे गिरफ्तार किया और अनुसंधान पूरा कर उसके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित कर दिया. वह घटना के दिन से ही जेल में बंद है. इस संबंध में जानकारी देते हुए पोक्सो मामलों के विशेष लोक अभियोजक नैला बेगम ने बताया कि 4 नवंबर 2022 की घटना को उन्होंने भी गंभीरता से लिया. इस मामले में अभियोजन द्वारा कल 7 लोगों की गवाही न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई. गवाही देने वालों में पुलिस पदाधिकारी और चिकित्सक साथ-साथ बालिकाओं के परिजन शामिल हैं. इस पूरे मामले की लंबी सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने आरोपी को भारतीय दंड विधान की धारा 376 ए बी (12 साल से कम आयु के साथ दुष्कर्म) और पोक्सो अधिनियन की धारा 6 ( गंभीर प्रकृति के यौनाचार) के तहत दोषी पाया जाने के बाद उसे दोनों अधिनियम के तहत सजा सुनाई. विशेष लोक अभियोजक के बताया कि बुधवार को सजा की अवधि पर बहस के दौरान उसने न्यायाधीश से दोषी को कानून के प्रावधानों के तहत अधिकतम सजा देने की मांग की. जबकि बचाव पक्ष द्वारा दोषी के प्रथम अपराध को ध्यान में रखते हुए कम से कम सजा की गुहार लगाई. बचाव पक्ष ने दोषी के सजा के मामले को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती देने की भी जानकारी दी है.
यौन शोषण में ट्यूटर को 20 साल की सजा, 50-50 हजार का अर्थदंड
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