— सोनू कुमार पत्रकार
दिल्ली: जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली में जल अनुसंधान और विकास पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर श्री सी आर पाटिल ने कहा कि कार्यशाला में जल संकट के समाधानों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभूतपूर्व नवाचारों और नई प्रौद्योगिकियों का एकीकरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। श्री पाटिल ने इस क्षेत्र में नए विचार लाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से एक साथ आए हितधारकों के सामूहिक संकल्प की सराहना की।
जल शक्ति मंत्रालय और इसरो ने जल संसाधन आकलन, निगरानी और प्रबंधन के लिए उपग्रह-आधारित अनुप्रयोगों और उन्नत प्रौद्योगिकियों को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसमें 24 प्राथमिकता वाले अध्ययन और सहयोग के क्षेत्र पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं। सभा को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से बढ़ रही है और वर्तमान में यह नौ अरब डॉलर की है और निकट भविष्य में इसमें दस गुना वृद्धि होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि यह सहयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बार-बार दोहराए जाने वाले समग्र सरकारी दृष्टिकोण का प्रतीक है।
दोनों मंत्रियों ने जल से संबंधित उच्च-प्रभाव वाले क्षेत्रों में उन्नति के लिए मिशन माहा का भी शुभारंभ किया। यह जल शक्ति मंत्रालय और अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान की एक संयुक्त पहल है। इसका उद्देश्य जल संसाधन प्रबंधन, पेयजल, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता और जल उपयोग दक्षता जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अत्याधुनिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल तथा केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जल अनुसंधान पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया
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