मुंगेर–जमालपुर के सेवानिवृत रेलकर्मी बने निशाना, डाटा लीक की आशंका, बैंक निगरानी पर भी उठे सवाल
मुंगेर/पीयूष कुमार प्रियदर्शी
मुंगेर जिले में सेवानिवृत रेलकर्मियों को पेंशन बंद होने का भय दिखाकर साइबर ठगों द्वारा लाखों रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जमालपुर निवासी रेलकर्मी मनोज कुमार 30 अगस्त 2025 को सेवानिवृत हुए थे। 18 दिसंबर को उनके व्हाट्सएप पर पीपीओ (पेंशन पेमेंट ऑर्डर) से संबंधित एक फॉर्म भेजा गया। इसके बाद कॉल कर खुद को रेलवे अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि यदि फॉर्म अपडेट नहीं किया गया तो उनकी पेंशन बंद कर दी जाएगी।
ठगों के झांसे में आकर मनोज कुमार ने यूपीआई से जुड़ी जानकारी साझा कर दी। इसके बाद मोबाइल पर आए ओटीपी भी ठगों को मिल गए। इसका नतीजा यह हुआ कि एक ही दिन में 11 ट्रांजेक्शन के जरिए उनके एसबीआई खाते से कुल 22 लाख 55 हजार रुपये निकाल लिए गए।
इसी तरह एक अन्य रिटायर्ड रेलकर्मी गजेंद्र साह के खाते से भी साइबर ठगों ने 88 हजार 196 रुपये की ठगी कर ली। दोनों पीड़ित अब न्याय की गुहार लगाते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे हैं।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि हाल ही में सेवानिवृत हुए कर्मचारियों की पूरी जानकारी साइबर ठगों तक आखिर कैसे पहुंच रही है। सूत्रों की मानें तो विभागीय स्तर पर कई चरणों में डाटा लीक होने की आशंका है, जिसका फायदा उठाकर ठग पेंशन बंद होने का डर दिखा रहे हैं। हैरानी की बात यह भी है कि एक ही दिन में बार-बार 4.99 लाख रुपये के ट्रांजेक्शन होने के बावजूद बैंक स्तर पर कोई रोक नहीं लगी।
बाइट – सैयद इमरान मसूद, एसपी मुंगेर:
“इन दिनों साइबर ठग रिटायर्ड रेलकर्मियों को पेंशन बंद होने का डर दिखाकर ठगी कर रहे हैं। पीड़ितों के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर साइबर थाना पुलिस जांच कर रही है। सेवानिवृत कर्मी किसी भी जानकारी के लिए केवल विभागीय माध्यमों का ही सहारा लें। व्हाट्सएप या फोन पर आने वाले मैसेज को नजरअंदाज करें और बैंक या यूपीआई से जुड़ी कोई भी जानकारी साझा न करें।”
साइबर ठगी के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर सतर्कता की जरूरत को उजागर कर दिया है। पेंशन, बैंक या यूपीआई से जुड़ा कोई भी कॉल या मैसेज आए तो पहले उसकी सत्यता जरूर जांचें, ताकि वर्षों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।



